गिलास में पानी भरकर उसमें बर्फ डालिए। बर्फ नीचे जाने के बजाय ऊपर तैरने लगती है। आपने यह नजारा कई बार देखा होगा, लेकिन क्या कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?
आखिर बर्फ भी पानी से ही बनती है, फिर वह पानी में डूबती क्यों नहीं?
पानी जमने पर क्या बदलता है?
जब पानी ठंडा होकर बर्फ बनता है, तो उसके अणु एक खास ढंग से व्यवस्थित हो जाते हैं। इस बनावट में अणुओं के बीच थोड़ी ज्यादा जगह होती है।
इस वजह से बर्फ का आयतन बढ़ जाता है, जबकि उसका द्रव्यमान वही रहता है। यानी समान मात्रा के तरल पानी की तुलना में बर्फ कम घनी हो जाती है।
घनत्व का क्या मतलब है?
आसान भाषा में, किसी चीज के एक निश्चित आयतन में कितना द्रव्यमान है, इसे उसका घनत्व कहते हैं।
बर्फ का घनत्व तरल पानी से कम होता है। इसी कारण बर्फ पानी पर तैरती है, ठीक वैसे ही जैसे कोई हल्की चीज अपने से अधिक घनत्व वाले तरल की सतह पर तैर सकती है।
क्या इससे प्रकृति को भी फायदा होता है?
हां! सर्दियों में झीलों और तालाबों की सतह पर बर्फ जम सकती है, जबकि नीचे पानी तरल बना रह सकता है। सतह पर जमी बर्फ गर्मी के बाहर निकलने की गति कम करती है, जिससे नीचे के पानी को जमने से बचाने में मदद मिलती है।
इससे मछलियों और दूसरे जलीय जीवों के लिए ठंड के मौसम में जीवित रहना आसान हो सकता है।
यानी बर्फ का पानी पर तैरना सिर्फ एक रोचक प्रयोग नहीं, बल्कि जलीय जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
















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