सर्दियों की सुबह जब आप घर से बाहर निकलते हैं और साँस छोड़ते हैं, तो मुँह से सफेद धुएँ जैसी चीज निकलती दिखाई देती है। लेकिन गर्मियों में ऐसा क्यों नहीं होता? क्या हमारी साँस में सचमुच धुआँ होता है?
इसका जवाब बहुत आसान है।
साँस से सफेद धुआँ कैसे बनता है?
सबसे पहले यह समझिए कि हमारी साँस में पानी की भाप भी होती है। हमारे शरीर के अंदर का तापमान बाहर की ठंडी हवा से अधिक होता है। इसलिए जब हम साँस छोड़ते हैं, तो गर्म और नम हवा मुँह से बाहर निकलती है।
सर्दियों में यह हवा ठंडे वातावरण के संपर्क में आती है। इससे हवा में मौजूद जलवाष्प का कुछ हिस्सा बहुत छोटी-छोटी पानी की बूंदों में बदल जाता है।
ये छोटी बूंदें रोशनी को बिखेरती हैं, इसलिए हमें साँस सफेद धुएँ जैसी दिखाई देती है।
गर्मियों में ऐसा क्यों नहीं दिखता?
गर्मियों में आसपास की हवा आमतौर पर इतनी ठंडी नहीं होती कि साँस की जलवाष्प तेजी से छोटी बूंदों में बदल जाए। इसलिए साँस सामान्य रूप से दिखाई नहीं देती।
हालाँकि, बहुत ठंडे मौसम में यह सफेद धुंध ज्यादा साफ दिखाई दे सकती है।
क्या यह असली धुआँ है?
नहीं! यह आग या जलने से बनने वाला धुआँ नहीं है। यह मुख्य रूप से पानी की बेहद छोटी बूंदों से बनी अस्थायी धुंध होती है, जो हवा में फैलकर धीरे-धीरे गायब हो जाती है।
अगली बार सर्दियों में साँस छोड़ते समय सफेद धुंध दिखाई दे, तो याद रखिएगा—यह हमारे शरीर और ठंडे वातावरण के बीच होने वाली एक छोटी-सी वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
















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