माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई हर साल क्यों बढ़ रही है? जानिए वैज्ञानिक कारण

Author: Awaneesh  •  Date: 2 September 2026  •  Read Time: 6 min read

माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई हर साल क्यों बढ़ रही है? जानिए वैज्ञानिक कारण

साल 2020 में नेपाल और चीन की सरकारों ने संयुक्त रूप से एवरेस्ट की नई ऊंचाई 8,848.86 मीटर घोषित की थी, जो इसके पिछले आधिकारिक माप से 86 सेंटीमीटर ज्यादा थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एवरेस्ट हर साल लगभग 4 मिलीमीटर (0.16 इंच) की रफ्तार से ऊंचा हो रहा है।

आखिर जमीन के अंदर ऐसा क्या चल रहा है जो इस विशालकाय पर्वत को लगातार ऊपर की तरफ धकेल रहा है? आइए आज एक वरिष्ठ साइंस पत्रकार के नजरिए से, पृथ्वी की परतों और टेक्टोनिक प्लेट्स की गहराई में उतरकर इस भूवैज्ञानिक रहस्य को पूरी तरह से डिकोड करते हैं।

1.एवरेस्ट का जन्म: जब दो महाद्वीप आपस में टकराए

माउंट एवरेस्ट की बढ़ती ऊंचाई को समझने के लिए हमें समय के पहिए को लगभग 5 करोड़ (50 Million) साल पीछे ले जाना होगा। उस समय पृथ्वी का नक्शा वैसा नहीं था जैसा आज हम देखते हैं।

आज का भारतवर्ष पहले एक विशाल द्वीप हुआ करता था, जो अफ्रीका महाद्वीप के पास स्थित था। इसे भूविज्ञान की भाषा में 'इण्डियन प्लेट' (Indian Plate) कहा जाता है। यह प्लेट बहुत तेजी से (लगभग 15 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से) उत्तर की ओर बढ़ने लगी। उत्तर में पहले से ही एक बहुत बड़ी प्लेट मौजूद थी, जिसे 'यूरेशियन प्लेट' (Eurasian Plate) कहा जाता है, जिसपर आज का एशिया महाद्वीप बसा है।

जब इण्डियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच की दूरी खत्म हुई, तो उनके बीच मौजूद 'टेथिस सागर' (Tethys Sea) का तल दोनों प्लेटों के भारी दबाव के कारण मुड़ने और ऊपर उठने लगा।

इसे एक आसान व्यावहारिक उदाहरण से समझते हैं:

मान लीजिए आप एक बड़ी दरी या कालीन को फर्श पर बिछाते हैं और उसके दोनों सिरों को अपने दोनों हाथों से एक-दूसरे की तरफ धकेलते हैं। आप देखेंगे कि कालीन बीच में से मुड़कर ऊपर की तरफ उठने लगती है। ठीक इसी तरह दो महाद्वीपों के टकराने से 'हिमालय पर्वत श्रृंखला' और उसकी सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का जन्म हुआ।

2.टेक्टोनिक प्लेट्स का खेल: क्यों आज भी जारी है यह टकराव?

अब सवाल यह उठता है कि जो टकराव 5 करोड़ साल पहले शुरू हुआ था, क्या वह अब रुक चुका है? इसका जवाब है—बिल्कुल नहीं।

हमारी पृथ्वी के अंदर मौजूद मैग्मा (पिघला हुआ लावा) लगातार उबल रहा है, जिसके कारण इसके ऊपर तैरने वाली टेक्टोनिक प्लेट्स हमेशा गति में रहती हैं। इण्डियन प्लेट आज भी थमी नहीं है। वह आज भी लगातार उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है (लगभग 2 से 5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से)।

चूंकि यूरेशियन प्लेट बहुत भारी और स्थिर है, इसलिए जब इण्डियन प्लेट उसके अंदर घुसने की कोशिश करती है, तो भारी चट्टानी दबाव बनता है। यह दबाव पहाड़ों को ऊपर की तरफ उठाता है। यही कारण है कि पूरा हिमालय क्षेत्र और विशेष रूप से माउंट एवरेस्ट हर साल कुछ मिलीमीटर ऊपर उठ जाता है।

3.नया वैज्ञानिक मोड़: अरुण नदी और 'आइसोस्टैटिक रिबाउंड'

साल 2024 में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के वैज्ञानिकों ने एक बेहद चौंकाने वाली रिसर्च पब्लिश की। उन्होंने बताया कि प्लेट टेक्टोनिक्स के अलावा एवरेस्ट के पास मौजूद अरुण नदी (Arun River) भी इसकी ऊंचाई बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। विज्ञान की भाषा में इस प्रक्रिया को आइसोस्टैटिक रिबाउंड (Isostatic Rebound) कहा जाता है।

यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

अरुण नदी एवरेस्ट के पहाड़ों से बहुत तेजी से बहती है। पिछले हजारों सालों में इस नदी ने पहाड़ के निचले हिस्से से लाखों टन मिट्टी, मलबे और चट्टानों को काट-काटकर बहा दिया है (River Erosion)।

इसे एक आसान नाव के उदाहरण से समझें:

जब एक बड़ी नाव पानी में तैरती है और आप उसपर भारी सामान लाद देते हैं, तो वह पानी में नीचे धंस जाती है। लेकिन जैसे ही आप नाव से सामान उतारना शुरू करते हैं, नाव का वजन हल्का हो जाता है और वह पानी के ऊपर की तरफ उठने लगती है।

ठीक इसी तरह, जब अरुण नदी एवरेस्ट के आधार से भारी चट्टानों को काटकर बहा देती है, तो पृथ्वी की ऊपरी परत (Crust) हल्की हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, पृथ्वी के नीचे मौजूद पिघला हुआ मैग्मा उस हल्के हिस्से को ऊपर की तरफ धकेलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस 'आइसोस्टैटिक रिबाउंड' के कारण एवरेस्ट को हर साल लगभग 0.2 से 0.5 मिलीमीटर की अतिरिक्त ऊंचाई मिल रही है।

4.एवरेस्ट की ऊंचाई कैसे मापी जाती है?

पहाड़ की ऊंचाई बढ़ने की इस सूक्ष्म रफ्तार को वैज्ञानिक आखिर नापते कैसे हैं? इसके तरीके समय के साथ बहुत एडवांस हो चुके हैं:

  1. पारंपरिक तरीका (Theodolite Survey): 1850 के दशक में सर जॉर्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण (Great Trigonometrical Survey) किया गया था। उस समय वैज्ञानिक दूरबीन जैसे दिखने वाले उपकरण 'थियोडोलाइट' और त्रिकोणमिति (Trigonometry) के गणितीय फॉर्मूलों की मदद से मिलों दूर खड़े होकर पहाड़ों की ऊंचाई नापते थे।
  2. आधुनिक तरीका (GPS & Satellite): आज के दौर में पर्वतारोही और वैज्ञानिक एवरेस्ट की चोटी पर जाकर एक विशेष GPS (Global Positioning System) रिसीवर और अल्ट्रा-सेंसिटिव रडार स्थापित करते हैं। यह रिसीवर सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स से संपर्क करता है और चोटी की सटीक स्थिति को मिलीमीटर की शुद्धता के साथ रिकॉर्ड करता है।

5.क्या भूकंप आने से एवरेस्ट की ऊंचाई घट भी सकती है?

प्रकृति का नियम संतुलन का है। अगर कोई बल एवरेस्ट को ऊपर उठा रहा है, तो कुछ ताकतें ऐसी भी हैं जो इसे छोटा करने का प्रयास करती हैं।

  1. विनाशकारी भूकंप: जब टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच का तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वह भूकंप (Earthquake) के रूप में बाहर आता है। साल 2015 में नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भयानक भूकंप के बाद वैज्ञानिकों ने पाया था कि एवरेस्ट के आस-पास की कुछ चोटियों की ऊंचाई कुछ सेंटीमीटर कम हो गई थी, क्योंकि चट्टानें खिसक कर नीचे बैठ गई थीं।
  2. प्राकृतिक कटाव (Erosion & Gravity): भारी बर्फबारी, ग्लेशियरों का खिसकना, तेज हवाएं और गुरुत्वाकर्षण बल लगातार एवरेस्ट की चोटी को घिसने (Wear and Tear) का काम करते हैं।

यानी, एवरेस्ट की अंतिम ऊंचाई इस बात पर निर्भर करती है कि प्लेटों के टकराने और नदी के कटाव से होने वाली 'ऊंचाई की बढ़त', भूकंप और प्राकृतिक घिसावट से होने वाले 'नुकसान' से कितनी ज्यादा है। फिलहाल, बढ़त का पलड़ा भारी है!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या कभी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई बढ़ना बंद होगी?

Ans: हाँ, लेकिन इसमें करोड़ों साल का समय लगेगा। जब पृथ्वी के अंदर का मैग्मा पूरी तरह ठंडा हो जाएगा और टेक्टोनिक प्लेट्स की गति रुक जाएगी, तब पहाड़ों का बढ़ना बंद हो जाएगा। उसके बाद केवल प्राकृतिक कटाव (Erosion) काम करेगा, जिससे पहाड़ धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे।

Q2. माउंट एवरेस्ट को नेपाल और चीन में किस नाम से जाना जाता है?

Ans: नेपाल के लोग इसे बेहद सम्मान से 'सागरमाथा' (Sagarmatha) कहते हैं, जिसका अर्थ है 'आकाश का भाल'। वहीं तिब्बत और चीन में इसे 'चोमोलुंगमा' (Chomolungma) कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'ब्रह्मांड की देवी माँ'।

Q3. क्या एवरेस्ट हमेशा से दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ रहा है?

Ans: भूवैज्ञानिक इतिहास के अनुसार नहीं। करोड़ों साल पहले जब हिमालय का जन्म भी नहीं हुआ था, तब स्कॉटलैंड और अमेरिका के कुछ पहाड़ (जैसे एप्लाचियन पर्वत) दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ हुआ करते थे। लेकिन समय के साथ वे घिसकर छोटे हो गए और युवा हिमालय उनसे आगे निकल गया।

✅ मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)

  1. माउंट एवरेस्ट हर साल औसतन 4 मिलीमीटर की रफ्तार से ऊंचा हो रहा है।
  2. इस बढ़त का मुख्य कारण इण्डियन प्लेट का लगातार यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसना है।
  3. अरुण नदी द्वारा पहाड़ों के निचले हिस्से को काटने से 'आइसोस्टैटिक रिबाउंड' होता है, जो पहाड़ को ऊपर उठाता है।
  4. भूकंप और प्राकृतिक घिसावट एवरेस्ट की ऊंचाई को अस्थाई रूप से कम भी कर सकते हैं।

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