क्या आप जानते हैं बिस्कुट में छोटे-छोटे छेद क्यों होते हैं? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प विज्ञान -
चाय का कप हाथ में हो और साथ में बिस्कुट न हो, तो भारतीयों की सुबह अधूरी सी लगती है। पारले-जी (Parle-G) से लेकर महंगे क्रीम क्रैकर्स तक, हम सबने बचपन से आज तक हज़ारों बिस्कुट खाए होंगे। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि लगभग हर क्रिस्पी बिस्कुट के ऊपर छोटे-छोटे छेद बने होते हैं?ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि यह बिस्कुट को सुंदर दिखाने के लिए कोई डिज़ाइन बनाई गई है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके पीछे कोई फैशन नहीं, बल्कि विज्ञान और मैन्युफैक्चरिंग का एक बहुत बड़ा कारण छिपा है।
अगर ये छेद न हों, तो शायद आप कभी मार्केट से बिस्कुट खरीदेंगे ही नहीं।
आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह।इन छेदों को क्या कहा जाता है?
बिस्कुट के ऊपर दिखने वाले इन छेदों को साइंस और फूड इंडस्ट्री की भाषा में 'डॉकर होल्स' (Docker Holes) कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को 'डॉकिंग' कहते हैं। ये छेद कोई गलती से या रैंडम तरीके से नहीं बनाए जाते, बल्कि फैक्ट्रियों में मशीनों के जरिए बहुत नाप-तोल कर एक निश्चित दूरी पर किए जाते हैं। छेद करने के पीछे का असली विज्ञान (The Science of Baking)बिस्कुट बनाने के लिए मैदा, चीनी, दूध और बटर जैसी चीजों को मिलाकर एक डो (आटा) तैयार किया जाता है। जब इस आटे को बड़ी-बड़ी भट्टियों (Ovens) में पकने के लिए डाला जाता है, तो भारी तापमान के कारण आटे के अंदर मौजूद नमी और हवा गर्म होकर भाप (Steam) बनने लगती है।
अब असली खेल यहीं शुरू होता है:भाप को बाहर निकालना: पकाने के दौरान बिस्कुट के अंदर जो गर्म हवा और भाप बनती है, उसे बाहर निकलने के लिए रास्ते की जरूरत होती है। ये छोटे-छोटे छेद उसी भाप को बाहर निकलने का रास्ता देते हैं।
अगर छेद न हों तो क्या होगा:
मान लीजिए अगर बिस्कुट में ये छेद न किए जाएं, तो भाप अंदर ही फंसी रह जाएगी। इससे बिस्कुट बीच में से गुब्बारे की तरह फूल जाएगा या फिर उसमें दरारें पड़ जाएंगी और वह टूट जाएगा। फूले हुए और आड़े-टेढ़े बिस्कुट को न तो पैक करना आसान होगा और न ही कोई उसे खरीदना चाहेगा। बिस्कुट को क्रिस्पी और कुरकुरा बनानाहम सबको वही बिस्कुट पसंद आता है जो कड़क हो और दांतों के नीचे आते ही 'क्रंच' की आवाज करे।
बिस्कुट का यह कुरकुरापन भी इन्हीं छेदों की वजह से आता है।जब छेदों के रास्ते भाप बाहर निकल जाती है, तो बिस्कुट अंदर और बाहर दोनों तरफ से बिल्कुल बराबर मात्रा में पकता है। इससे बिस्कुट पूरी तरह सूख जाता है और उसमें परफेक्ट क्रिस्पीनेस आती है। अगर छेद नहीं होंगे, तो बिस्कुट अंदर से कच्चा या नरम रह जाएगा, जिससे उसका स्वाद खराब हो जाएगा।
क्या सभी बिस्कुटों में छेद होते हैं?
नहीं, सभी बिस्कुटों में छेद नहीं होते। अगर आप ध्यान दें, तो कुकीज (Cookies) या जो बिस्कुट बहुत ज्यादा सॉफ्ट और हैवी बटर वाले होते हैं, उनमें छेद नहीं किए जाते। ऐसा इसलिए क्योंकि कुकीज को थोड़ा फूलने और सॉफ्ट रहने की जरूरत होती है।
डॉकर होल्स सिर्फ उन्हीं बिस्कुटों में बनाए जाते हैं जिन्हें बिल्कुल फ्लैट (चपटा) और कड़क रखना होता है, जैसे मैरी लाइट, साल्टेड क्रैकर्स या पारले-जी।निष्कर्षतो अगली बार जब आप सुबह की चाय में बिस्कुट डुबोएं, तो समझ जाइएगा कि वह छोटा सा छेद कोई मामूली डिजाइन नहीं है। वह इंजीनियरिंग और साइंस का एक ऐसा अनोखा तरीका है, जिसकी वजह से वह बिस्कुट सही शेप में और बिना टूटे आपकी प्लेट तक पहुंच पाया है।🚀







टिप्पणियाँ / Comments (0)
लोड हो रहा है... / Loading...